टीडीएस (TDS) क्या है?
TDS का मतलब है Tax Deducted at Source यानी “स्रोत पर कर कटौती।”
जब आप किसी को पैसा देते हैं — जैसे वेतन, किराया, ब्याज, प्रोफेशनल फीस आदि — तो उस पैसे में से कुछ हिस्सा (टैक्स के रूप में) पहले ही काट लिया जाता है और सरकार को जमा कर दिया जाता है।
इसका मतलब है कि पूरा पैसा पाने वाले को नहीं मिलता, उसमें से थोड़ा टैक्स काटकर सरकार को दिया जाता है।
TDS (Tax Deducted at Source) को एक सरल उदाहरण के साथ समझते हैं:
TDS कैसे काम करता है?
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मान लीजिए आप किसी को ₹50,000 देते हैं।
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इस पैसे में से 10% टैक्स कटता है यानी ₹5,000।
-
आपको या जिसे भी पैसा मिलेगा, उसे ₹45,000 मिलेंगे।
-
जो ₹5,000 काटा गया है, वह सीधे सरकार को जमा होता है।
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उस व्यक्ति को टैक्स रिटर्न भरते वक्त जो टैक्स काटा गया है, उसका क्रेडिट मिलता है।
मान लीजिए आप किसी को ₹50,000 देते हैं।
इस पैसे में से 10% टैक्स कटता है यानी ₹5,000।
आपको या जिसे भी पैसा मिलेगा, उसे ₹45,000 मिलेंगे।
जो ₹5,000 काटा गया है, वह सीधे सरकार को जमा होता है।
उस व्यक्ति को टैक्स रिटर्न भरते वक्त जो टैक्स काटा गया है, उसका क्रेडिट मिलता है।
TDS के उदाहरण
उदाहरण 1: वेतन पर TDS
अगर आपकी मासिक सैलरी ₹50,000 है, और TDS दर 10% है तो:
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कुल सैलरी = ₹50,000
-
TDS = ₹5,000 (10% कटौती)
-
आपको मिलेंगे = ₹45,000
-
₹5,000 कंपनी सरकार को जमा करेगी।
उदाहरण 2: किराए पर TDS
आप किसी को ₹20,000 मासिक किराया देते हैं, और TDS दर 10% है तो:
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किराया = ₹20,000
-
TDS = ₹2,000
-
मालिक को देंगे = ₹18,000
-
₹2,000 सरकार को देंगे।
उदाहरण 3: प्रोफेशनल फीस पर TDS
आप किसी को प्रोफेशनल फीस के रूप में ₹30,000 देते हैं, और TDS दर 10% है तो:
-
फीस = ₹30,000
-
TDS = ₹3,000
-
प्रोफेशनल को देंगे = ₹27,000
-
₹3,000 सरकार को जमा करेंगे।
TDS क्यों जरूरी है?
-
इससे सरकार को टैक्स जल्दी मिलता है।
-
लोग टैक्स छुपा नहीं पाते।
-
टैक्स देने वालों को आसानी होती है क्योंकि टैक्स पहले ही कट जाता है।
-
यदि ज्यादा टैक्स कट गया हो तो रिटर्न भरते वक्त वापस मिल जाता है।
इससे सरकार को टैक्स जल्दी मिलता है।
लोग टैक्स छुपा नहीं पाते।
टैक्स देने वालों को आसानी होती है क्योंकि टैक्स पहले ही कट जाता है।
यदि ज्यादा टैक्स कट गया हो तो रिटर्न भरते वक्त वापस मिल जाता है।
उदाहरण:
मान लीजिए, आपका एक व्यवसाय है और आपने किसी ठेकेदार को ₹50,000 का काम दिया।
कानून के अनुसार, आपको उस ₹50,000 में से कुछ प्रतिशत (मान लें 10%) TDS के रूप में काटकर सरकार को जमा करना होगा।
क्या होगा?
- कुल भुगतान = ₹50,000
- TDS (10%) = ₹5,000 (जो आप सरकार को देंगे)
- ठेकेदार को आप देंगे = ₹50,000 - ₹5,000 = ₹45,000
टैली प्राइम में इसे कैसे रिकॉर्ड करें?
-
Payment Voucher बनाना
-
Party Ledger: ठेकेदार का नाम
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Amount: ₹50,000
-
TDS Ledger: ₹5,000 कटौती के लिए
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- टैली प्राइम में आप ₹50,000 का खर्च रिकॉर्ड करेंगे, लेकिन ठेकेदार को ₹45,000 का भुगतान होगा। ₹5,000 TDS आपके पास सरकार को जमा करने के लिए TDS Payable के रूप में दिखेगा।
सारांश:
-
आपने ₹5,000 TDS के तौर पर काटा और सरकार को देना होगा।
-
ठेकेदार को ₹45,000 ही मिलेंगे।
-
टैली प्राइम में यह स्वचालित रूप से कैलकुलेट और रिकॉर्ड होगा।
चलिए TDS को कुछ और उदाहरणों के साथ समझते हैं, जैसे Rent, Salary, और Professional Fees पर TDS कैसे लागू होता है।
1. Rent पर TDS का उदाहरण:
मान लीजिए आपकी कंपनी किसी दुकान या ऑफिस का मासिक किराया ₹30,000 देती है। सरकार के नियमों के अनुसार, अगर किराया ₹2,40,000 (₹20,000 × 12 महीने) से ज्यादा है, तो आपको किराए से 10% TDS काटना होगा।
-
किराया: ₹30,000
-
TDS (10%): ₹3,000
-
मकान मालिक को भुगतान: ₹27,000
टैली में कैसे दिखेगा?
-
Rent Expense Ledger: ₹30,000
-
TDS Payable Ledger: ₹3,000 कटौती
-
मकान मालिक को भुगतान: ₹27,000
2. Salary पर TDS का उदाहरण:
मान लीजिए आपकी कंपनी किसी कर्मचारी को ₹50,000 महीने की सैलरी देती है। सैलरी पर TDS स्लैब के हिसाब से टैक्स कटता है (मान लीजिए इस केस में 10%)।
-
सैलरी: ₹50,000
-
TDS (10%): ₹5,000
-
कर्मचारी को भुगतान: ₹45,000
टैली में:
-
Salary Expense Ledger: ₹50,000
-
TDS Deducted Ledger: ₹5,000 कटौती
-
कर्मचारी को भुगतान: ₹45,000
3. Professional Fees पर TDS का उदाहरण:
आपने किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) को ₹40,000 फीस दी। TDS की दर 10% है।
-
फीस: ₹40,000
-
TDS (10%): ₹4,000
-
CA को भुगतान: ₹36,000
टैली में आप:
-
Professional Fees Ledger: ₹40,000
-
TDS Payable Ledger: ₹4,000
-
CA को भुगतान: ₹36,000
संक्षेप में:
|
पेमेंट का प्रकार |
भुगतान राशि |
TDS दर (%) |
TDS राशि |
प्राप्तकर्ता को भुगतान |
|
Rent |
₹30,000 |
10% |
₹3,000 |
₹27,000 |
|
Salary |
₹50,000 |
10% |
₹5,000 |
₹45,000 |
|
Professional Fees |
₹40,000 |
10% |
₹4,000 |
₹36,000 |
TDS (Tax Deducted at Source) को और भी कुछ अलग-अलग उदाहरणों से समझते हैं ताकि पूरा कन्फ्यूजन दूर हो जाए:
1. Interest Income पर TDS:
अगर आपने बैंक से या किसी फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन से ₹1,00,000 का इंटरेस्ट कमाया और उस पर TDS दर 10% है।
-
Interest Income: ₹1,00,000
-
TDS कटौती: ₹10,000
-
आपको मिलेंगे: ₹90,000
2. Commission पर TDS:
आप एक एजेंट हैं और आपको कंपनी से ₹25,000 कमीशन मिलता है। कमीशन पर TDS दर 5% है।
-
Commission: ₹25,000
-
TDS कटौती: ₹1,250
-
आपको मिलेंगे: ₹23,750
3. Sale of Property (अचल संपत्ति विक्रय) पर TDS:
अगर आप ₹50 लाख की प्रॉपर्टी बेचते हैं, तो बायर को 1% TDS काटकर सरकार को जमा करना होगा।
-
Property Value: ₹50,00,000
-
TDS (1%): ₹50,000
-
Seller को भुगतान: ₹49,50,000
4. Contract Payment पर TDS:
आपने किसी कंस्ट्रक्शन कंपनी को ₹5,00,000 का ठेका दिया। इस पर TDS 2% है।
-
Contract Payment: ₹5,00,000
-
TDS कटौती: ₹10,000
-
ठेकेदार को भुगतान: ₹4,90,000
|
भुगतान का प्रकार |
भुगतान राशि |
TDS दर (%) |
TDS राशि |
प्राप्तकर्ता को भुगतान |
|
Interest Income |
₹1,00,000 |
10% |
₹10,000 |
₹90,000 |
|
Commission |
₹25,000 |
5% |
₹1,250 |
₹23,750 |
|
Property Sale |
₹50,00,000 |
1% |
₹50,000 |
₹49,50,000 |
|
Contract Payment |
₹5,00,000 |
2% |
₹10,000 |
₹4,90,000 |
अब टैली प्राइम में TDS के साथ वाउचर कैसे बनाएं ये स्टेप-बाय-स्टेप देखते हैं, एक उदाहरण के साथ — मान लीजिए हम "Contract Payment" के लिए वाउचर बनाएंगे।
टैली प्राइम में TDS के साथ वाउचर बनाने का तरीका:
उदाहरण:
आपने ₹5,00,000 का ठेका दिया है, जिस पर 2% TDS लगेगा। यानी ₹10,000 TDS कटेगा।
Step 1: टैली प्राइम खोलें
Gateway of Tally में जाएं।
Step 2: TDS सेटिंग एक्टिवेट करें
-
F11: Features > Statutory & Taxation में जाकर Enable TDS को Yes करें।
-
Nature of Payment (जैसे Contract Payment) सेट करें।
Step 3: लेजर बनाएं
-
Contractor का Ledger बनाएँ (Group: Sundry Creditors)।
-
TDS Ledger बनाएँ (Group: Duties & Taxes > TDS Payable)।
-
Contract Expense Ledger बनाएँ (Group: Expenses).
Step 4: Payment वाउचर बनाएँ
-
Gateway of Tally > Accounting Vouchers > F5: Payment चुनें।
-
Party Ledger: Contractor का नाम चुनें।
-
Amount: ₹5,00,000 डालें।
-
TDS Deduction का विकल्प आएगा, वहां TDS की दर 2% डालें।
-
टैली खुद ही TDS की गणना करेगा और कुल भुगतान में से TDS काट देगा।
-
Payment Amount में ₹4,90,000 दिखेगा (₹5,00,000 - ₹10,000)।
-
TDS Ledger में ₹10,000 रिकॉर्ड होगा।
Step 5: Voucher सेव करें
Step 6: रिपोर्ट देखें
-
Gateway of Tally > Display > Statutory Reports > TDS Reports में जाकर आप TDS की डिटेल्स देख सकते हैं।
|
Action |
Details |
|
Total Contract Amount |
₹5,00,000 |
|
TDS Rate |
2% |
|
TDS Deducted |
₹10,000 |
|
Payment to Contractor |
₹4,90,000 |
1. TDS के अलग-अलग रेट (दरें)
TDS की दरें अलग-अलग प्रकार के भुगतान पर अलग होती हैं। कुछ सामान्य दरें इस प्रकार हैं:
|
भुगतान का प्रकार |
TDS की दर |
|
वेतन
(Salary) |
टैक्स
स्लैब के अनुसार (0% से 30%) |
|
किराया
(Rent) |
10% (अगर ₹50,000 से ऊपर हो मासिक) |
|
प्रोफेशनल
फीस (Professional
Fees) |
10% |
|
ब्याज
(Interest on Bank
Deposits) |
10% |
|
कमीशन/बोनस
(Commission/Bonus) |
5% |
नोट: कुछ मामलों में यह दरें बदल भी सकती हैं, इसलिए अपडेटेड जानकारी के लिए आयकर विभाग की वेबसाइट देखना जरूरी है।
2. TDS के फॉर्म्स
-
Form 16: जब नौकरी में TDS काटा जाता है, तो कंपनी या नियोक्ता द्वारा यह सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। इसमें सालभर की कटौती की पूरी जानकारी होती है।
-
Form 16A: यह तब दिया जाता है जब TDS सैलरी के अलावा किसी और इनकम (जैसे प्रोफेशनल फीस, किराया) पर काटा जाता है।
-
Form 26AS: यह एक समग्र रिपोर्ट होती है, जिसमें आपकी सारी TDS कटौती, टैक्स भुगतान और रिफंड की जानकारी होती है। आप इसे ऑनलाइन देख सकते हैं।
3. TDS रिटर्न फाइलिंग
जो व्यक्ति या कंपनी TDS काटती है, उसे हर तिमाही सरकार को TDS की रिपोर्ट (return) फाइल करनी होती है। इसमें वह बताता है कि उसने कितनी TDS काटी और सरकार को जमा की।
अगर TDS सही से जमा नहीं होती, तो जुर्माना या पेनल्टी लग सकती है।
4. TDS की कटौती के बाद रिफंड
अगर आपने साल भर में ज्यादा TDS दिया है, तो जब आप अपनी आयकर रिटर्न भरते हैं, तो वह अतिरिक्त रकम आपको वापस मिल सकती है।
1. TDS की
पूरी दरें (Rates) और किस पेमेंट पर क्या कटता है?
|
भुगतान का प्रकार |
TDS दर (Rate) |
|
वेतन
(Salary) |
आपकी
आयकर स्लैब के अनुसार (0%
से 30%) |
|
किराया
(Rent) |
10% (अगर ₹50,000 से ज्यादा मासिक किराया हो) |
|
प्रोफेशनल
फीस (Professional
Fees) |
10% |
|
बैंक
डिपॉजिट पर ब्याज (Bank
Interest) |
10% |
|
कमीशन
/ ब्रोकर फीस (Commission) |
5% |
|
पुरस्कार, ईनाम (Prizes) |
30% |
|
डिविडेंड
(Dividend) |
10% |
नोट: ये दरें समय-समय पर बदल सकती हैं, इसलिए आयकर विभाग की
वेबसाइट पर अपडेट चेक करें।
2.
Form 16 और Form 16A क्या हैं और इन्हें
कैसे प्राप्त करें?
·
Form 16:
यह प्रमाण पत्र आपकी सैलरी पर कटे हुए TDS का
होता है। आपकी कंपनी या नियोक्ता हर साल आपको यह फॉर्म देता है। इसमें आपकी कुल
सैलरी, कटे हुए TDS, और टैक्स की पूरी
जानकारी होती है।
·
Form 16A:
यह प्रमाण पत्र गैर-सैलरी आय (जैसे प्रोफेशनल फीस, किराया, ब्याज आदि) पर कटे हुए TDS का होता है। यह बैंक, कंपनी या जो भी TDS काटता है, वह फॉर्म जारी करता है।
इन्हें कैसे प्राप्त करें?
आम तौर पर आपकी कंपनी या बैंक आपको ये फॉर्म ईमेल या पोर्टल पर
उपलब्ध कराते हैं। आप इन फॉर्म्स को अपने खाते या IT पोर्टल
(incometax.gov.in) से भी डाउनलोड कर सकते हैं।
3.
Form 26AS क्या है और इसे कैसे देखें?
Form 26AS आपकी टैक्स क्रेडिट
स्टेटमेंट है। इसमें दिखता है कि आपकी इनकम पर कितना TDS कट
चुका है, आपने कितना टैक्स भरा है, और
किसी भी तरह का टैक्स रिफंड आपको मिला है।
इसे कैसे देखें:
·
आप
इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट (https://www.incometax.gov.in)
पर लॉगिन करें।
·
“My
Account” सेक्शन में जाएं।
·
वहाँ
से Form 26AS देख और डाउनलोड कर सकते हैं।
यह
फॉर्म आपको टैक्स रिटर्न भरने में बहुत मदद करता है।
4.
TDS रिटर्न ऑनलाइन कैसे फाइल करें?
जो
व्यक्ति या कंपनी TDS काटती है, उसे हर तिमाही में TDS रिटर्न फाइल करना होता है।
फाइल करने के स्टेप्स:
1.
आयकर
विभाग की वेबसाइट (https://www.incometax.gov.in)
पर जाएं।
2.
TDS
सेक्शन में लॉगिन करें।
3.
अपने
TAN नंबर
से रजिस्टर करें (जो TDS काटता है उसके पास होता है)।
4.
संबंधित
तिमाही के लिए TDS रिटर्न फॉर्म भरें।
5.
सभी
कटौतियों की जानकारी सही-सही भरें।
6.
ऑनलाइन
सबमिट करें और जरूरी हो तो भुगतान भी करें।
यदि
आप फाइलिंग नहीं करते, तो पेनल्टी लग सकती है।
5.
TDS रिफंड कैसे मिलता है और प्रक्रिया क्या है?
अगर
आपकी आयकर रिटर्न भरने पर पता चलता है कि आपने ज़्यादा TDS दिया है, तो आप उससे रिफंड पा सकते हैं।
रिफंड पाने की प्रक्रिया:
1.
अपनी
आयकर रिटर्न भरें और उसमें अपनी सारी आय और TDS
की जानकारी सही से डालें।
2.
अगर
आपकी कुल टैक्स की ज़रूरत उससे कम है जितना TDS
हुआ है, तो रिफंड क्लेम करें।
3.
रिटर्न
जमा करने के बाद IT विभाग आपकी जांच करता है।
4.
सब
ठीक रहा तो रिफंड आपके बैंक खाते में जमा कर दिया जाता है।
आप
अपनी रिफंड स्टेटस IT वेबसाइट पर भी देख सकते हैं।
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